Raja Vidya Raja Guhya Yoga
राजविद्या राजगुह्य योग
मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः। राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः॥ 9:12॥
मोघ-आशाः मोघ-कर्माणः मोघ-ज्ञानाः वि-चेतसः, राक्षसीम्, आसुरीम् च एव, प्रकृतिम् मोहिनीम् श्रिताः।
मोघ-आशाः (व्यर्थ आशाएँ रखने वाले), मोघ-कर्माणः (व्यर्थ कर्म करने वाले), मोघ-ज्ञानाः (व्यर्थ ज्ञान रखने वाले), वि-चेतसः (विचारहीन), राक्षसीम् (राक्षसी), आसुरीम् (आसुरी) च (और) मोहिनीम् (मोहकारी) प्रकृतिम् (प्रकृति का) एव (ही) श्रिताः (आश्रय लिए रहते हैं)।
Hindi
मिथ्या आशा, मिथ्या कर्म और मिथ्या ज्ञान वाले अविचारी जन राक्षसों और असुरों के भ्रमित करने वाले स्वभाव को धारण किए रहते हैं।
English
Their aspirations, actions, and knowledge yield no fruition; these misguided individuals seek refuge in the deluded nature of devils and monsters. (9:12)
Hindi
सोलहवें अध्याय में आसुरी और दैवी प्रकृति के लोगों के गुणों का विस्तार देखें।
English
In Chapter 16, the Lord provides a detailed description of the psychology and behavior of individuals with a demonical nature.