Sankhya Yoga
सांख्य योग
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनमाश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः। आश्चर्यवच्चैनमन्यः श्रृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ॥ 2:29॥
आश्चर्य-वत् पश्यति कश्चित् एनम्, आश्चर्य-वत् वदति तथा एव च, अन्यः आश्चर्य-वत् च एनम् अन्यः शृणोति; श्रुत्वा अपि एनम् वेद न च एव कश्चित्।
कश्चित् (कोई) एनम् (इस आत्मा को) आश्चर्य-वत् (आश्चर्य के समान) पश्यति (देखता है) च (और) तथा (इसी प्रकार) एव (ही) अन्यः (दूसरा व्यक्ति) आश्चर्य-वत् (आश्चर्य के साथ) वदति (कहता है) च (और) अन्यः (कोई अन्य व्यक्ति) एनम् (इस आत्मा को) आश्चर्य-वत् (आश्चर्य के साथ) शृणोति (सुनता है) च (और) कश्चित् (कोई व्यक्ति) श्रुत्वा (सुनने के बाद) अपि (भी) एनम् (इस आत्मा को) न एव (नहीं) वेद (जानता है)।
Hindi
कोई तो मानो आत्मा को आश्चर्य अर्थात अद्भुत वस्तु समझ कर इसे देखता है, कोई इसका आश्चर्य के साथ वर्णन करता है, तथा कोई इसे आश्चर्य के साथ सुनता है, लेकिन कोई भी {सामान्य व्यक्ति} इसे तत्त्वतः नहीं जानता।
English
{The soul remains an enigma.} Some gaze upon it in astonishment, others speak of its wonders in hushed tones, and a few stand in awe, mystified by its tales. However, even upon hearing, some remain untouched by its understanding. (2:29)