Raja Vidya Raja Guhya Yoga
राजविद्या राजगुह्य योग
अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्। साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः।। 9:30।।
अपि चेत् सु-दुराचारः भजते माम् अनन्य-भाक्, साधुः एव सः मन्तव्यः, सम्यक् व्यवसितः हि सः।
चेत् (यदि) सु-दुराचारः (अति दुराचारी) अपि (भी) अनन्य-भाक् (अनन्य भक्त) माम् (मुझे) भजते (भजता है) सः (वह) साधुः (साधु) एव (ही) मन्तव्यः (मान्य होने योग्य है) हि (क्योंकि) सः (वह) सम्यक् (ठीक तरह से) व्यवस्थितः (व्यवस्थित है)।
Hindi
यदि कोई अत्यंत पापी-दुराचारी भी अनन्य भाव से मुझको भजता है, तो वह सज्जन ही मानने योग्य है, क्योंकि वह सम्यक या पवित्र निश्चय वाला हो गया है, {क्योंकि उसने पवित्र परमेश्वर की शरण में आने का निश्चय कर लिया है}।
English
Even if a person of the most reprehensible character begins to worship Me with unwavering dedication, they should be regarded as having a noble heart, as they have cultivated a virtuous determination. (9:30)
Hindi
इस श्लोक से कुछ लोग यह पूछ सकते हैं कि ईश्वर का भक्त बनने वाले पापियों, दुष्कर्मियों तथा अपराधियों को 'साधु' कह कर भगवान उन्हें अनुचित संरक्षण तो प्रदान नहीं कर रहे? इस शंका का समाधान अगले ही श्लोक में कर दिया गया है। इसीलिए इन दोनों श्लोकों को साथ ही स्मरण करना चाहिए। अगला श्लोक यह कहता है कि ज्यों ही एक पापी भगवान का भक्त बनता है, वह धर्मात्मा भी बन जाता है। अपराधी जल्द ही धर्मात्मा बन जाए — इससे अच्छा और क्या हो सकता है? दुराचारी, पापी, दुष्कृतकारी आदि समकक्ष या समानार्थी शब्द हैं। पूर्व में श्लोक 4:36 के संदर्भ में वाणी, मन और शरीर के पापों पर थोड़ा प्रकाश डाला गया था। यहाँ थोड़े और विस्तार से दुराचार या पाप की एक सूची अध्याय 26, पंचम स्कंध, भागवत पुराण से दी जाती है, ताकि पाठकों में 'दुराचार' को लेकर अधिक स्पष्टता विकसित हो सके^12 — यौन-आचार संबंधी दुराचार पर-स्त्रीगमन^13 {बलात्कार, पर-पुरुषगमन} ("rape", "adultery") अगम्य स्त्री^14 या अगम्य पुरुष^15 के साथ संभोग ("incest"), व्यभिचार, बलात्कार पशु के साथ व्यभिचार पशु-पक्षी-कीट-पतंग के प्रति दुराचार: पशुबलि जीव-हिंसा ^16 जीवों को पीड़ा पहुँचाना ^17 जीवित पशुओं और पक्षियों का गला रेतना न्यायिक और प्रशासनिक दुराचार: राज-कर्मचारी (न्यायाधीश, पुलिस अधिकारी या अन्य अधिकारी) द्वारा किसी निरपराध को दंड झूठी गवाही राजा (शासक) या राजपुरुष^18 (अधिकारी) द्वारा धर्म-मर्यादा का उच्छेद राज-अधिकारी या राज-कर्मियों द्वारा जनता या व्यापारियों की विविध प्रकार से लूट-पाट और भयदोहन ("extortion") रामचरितमानस में भगवान राम यह बताते हैं कि जिस राजा के अधीन प्रजा दुखी रहती है वह राजा अवश्य ही नरक का अधिकारी होता है—'जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृपु अवसि नरक अधिकारी।।' (अयोध्याकांड 70:3; भागवतपुराण 1:17:10 भी देखें)। आर्थिक दुराचार: दूसरों की धन-संपत्ति का हरण चोरी-डकैती धन कमाने, बढ़ाने और बचाने के लिए पाप करना (भ्रष्टाचार, कालाबाजारी आदि) माता-पिता के प्रति अपराध: माता-पिता से विरोध {एवं उन्हें कष्ट देना} कुछ अन्य दुराचार: किसी का घर जलाना, विष देना अतिथि को क्रोध-भाव से देखना सिर्फ अपने कुटुंब की परवरिश में लगे रहना (अर्थात परोपकार-आदि नहीं करना, दान नहीं देना)।
English
This verse often raises questions among laypeople: Does God bestow undue protection on sinners by referring to them as "noble persons" simply because they sought refuge in Him? However, this concern is promptly addressed by God in the very next verse. Therefore, it is essential to consider both verses together. The subsequent verse emphasizes that as soon as someone, even a crook or sinner, becomes a devoted follower, they soon undergo a remarkable transformation toward righteousness. This transformation from a criminal or sinner into a saint is a testament to the profound impact of loving devotion or Bhakti. It signifies the incredible possibility of rapid spiritual growth and redemption.
^12 चौंतीसवाँ अध्याय, राजधर्मानुशासनपर्व (शांतिपर्व), महाभारत। ^13 एक अविवाहित पुरुष जब किसी विवाहिता स्त्री के साथ, या एक अविवाहिता स्त्री जब किसी विवाहित पुरुष के साथ, या एक विवाहित पुरुष किसी अन्य की विवाहिता स्त्री के साथ अथवा अविवाहित कन्या के साथ, अथवा एक विवाहिता स्त्री किसी दूसरे के पति के साथ अथवा किसी अविवाहित पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाए — तो इसे पर-स्त्रीगमन या पर-पुरुष-गमन कहते हैं। ^14 माँ, बहन इत्यादि। ^15 भाई, पिता आदि। ^16 खटमल, मच्छर, चूहे आदि मारना भी इसमें शामिल है। ^17 चलते-फिरते कुत्तों को पत्थर मारना, बैल को बिना आराम दिए लगातार काम कराना, बैल की गरदन में हो गए घावों की चिंता किए बिना उन्हें जोते रहना, घोड़ों को बिना आराम दिए दौड़ाते रहना — आदि ऐसे ही दुष्कर्म हैं। ^18 मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, मुख्य सचिव, सचिव, पुलिस महानिदेशक, एवं सभी विभागों के अन्य वरीय अधिकारी।