Raja Vidya Raja Guhya Yoga
राजविद्या राजगुह्य योग
पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः। वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च॥ 9:17॥
पिता अहम् अस्य जगतः, माता, धाता, पितामहः; वेद्यम्, पवित्रम् ओङ्कारः, ॠक्, साम, यजुः एव च।
अस्य (इस) जगतः (संसार का) धाता (धारण करने वाला), पिता (पिता) माता (माता), पितामहः (पितामह), वेद्यम् (जानने-योग्य), पवित्रम् (पवित्र) ओङ्कारः (ॐकार) ॠक् (ऋग्वेद) साम (सामवेद) च (और) यजुः (यजुर्वेद) अहम् (मैं) एव (ही हूँ)।
Hindi
मैं ही इस जगत का धाता (धारण करने वाला), पिता, माता, पितामह हूँ, तथा जानने-योग्य, पवित्र ऊँकार तथा ॠग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ।
English
In this world, I am the Father, the Mother, and the Grandfather; I am the Sustainer of the world; I am the Ultimate Knowledge to be realized; I am the sacred syllable "Aum," and I am the Rigveda, Sāmaveda, and Yajurveda. (9:17)
Hindi
अथर्ववेद क्यों नहीं शामिल किया, सोचें!
English
Find out why the Lord omitted the fourth Veda, the Atharvaveda.