Atma Samyama Yoga
आत्म संयम योग
तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्। यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन॥ 6:43॥
तत्र तम् बुद्धि-संयोगम् लभते पौर्व-देहिकम्; यतते च ततः भूयः सम्-सिद्धौ, कुरु-नन्दन!
तत्र (वहाँ) तम् (उसे) पौर्व-देहिकम् (पूर्व के शरीर से संबंधित) बुद्धि-संयोगम् (बुद्धि का संग) लभते (प्राप्त होता है) च (और) कुरु-नन्दन (हे कुरु के वंशज अर्जुन)! ततः (उसके बाद) भूयः (फिर) सम्-सिद्धौ (पूर्ण सिद्धि के लिए) यतते (प्रयत्न करता है)!
Hindi
वहाँ जन्म लेकर उस पहले वाली देह में संग्रह की हुई दिव्य चेतना से जुड़ाव को फिर से प्राप्त कर लेता है, और हे अर्जुन! उसके बाद वह संसिद्धि के लिए, यानी परमात्मा की प्राप्ति के लिए, फिर से प्रयत्न करता है।
English
{In this new life} The Yogi regains the spiritual progress achieved in the previous existence. O, Kurunandana (Arjuna), driven by past impressions, the Yogi resumes his journey toward complete Self-and-God-realization. (6:43)