Atma Samyama Yoga
आत्म संयम योग
पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोऽपि सः। जिज्ञासुरपि योगस्य शब्दब्रह्मातिवर्तते॥ 6:44॥
पूर्व-अभ्यासेन तेन एव ह्रियते हि अ-वशः अपि सः जिज्ञासुः अपि योगस्य शब्द-ब्रह्म अति-वर्तते।
सः (वह) अ-वशः (विवश होकर) अपि (भी) तेन (उस) पूर्व-अभ्यासेन (पूर्व के अभ्यास से) एव (ही) हि (निस्संदेह) ह्रियते (खिंचा आता है) योगस्य (योग-विद्या के) जिज्ञासुः (प्रति जो इच्छुक है, वह) अपि (भी) शब्द-ब्रह्म (ध्वनि-ब्रह्म, या वेदों के शब्दों को) अति-वर्तते (अत्यधिक रूप से पार कर जाता है)।
Hindi
वह {पूर्वजन्म में योग-साधना से भटक गया हुआ योग-साधक} उस पहले के अभ्यास से ही निःसंदेह {योग-साधना की ओर} खुद आकर्षित होता है, तथा योग का वह जिज्ञासु वेदों {में बताए गए सकाम कर्मों और उनके बंधनकारी फलों} से ऊपर उठ जाता है।
English
He is propelled on his onward path by his previous spiritual practice, as if involuntarily, and such seeker of union with God transcends the Holy Vedas. (6:44)