4:33श्रीभगवानुवाच

Jnana Karma Sannyasa Yoga

ज्ञान कर्म संन्यास योग

Sanskrit Shloka

श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप। सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते॥ 4:33॥

Padacheeda (Word-by-Word)

श्रेयान् द्रव्य-मयात् यज्ञात् ज्ञान-यज्ञः परन्तप! सर्वम् कर्म अखिलम्, पार्थ, ज्ञाने परि-समाप्यते।

Anvaya (Construction)

परन्तप (शत्रुओं का दमन करने वाले) पार्थ (पृथापुत्र अर्जुन)! द्रव्य-मयात् (भौतिक पदार्थों से किए गए) यज्ञात् (यज्ञ से) ज्ञान-यज्ञः (ज्ञानयज्ञ) श्रेयान् (श्रेष्ठ) अखिलम् (संपूर्ण) सर्वम् (सभी) कर्म (कर्म) ज्ञाने (ज्ञान में) परि-समाप्यते (समाप्त हो जाते हैं)।

Meaning

Hindi

हे अर्जुन! द्रव्य-यज्ञ (अग्नि में चावल, जौ, तिल, घृत आदि द्रव्यों का होम वाले वैदिक अग्नि-यज्ञ) की अपेक्षा ज्ञानयज्ञ बेहतर है, तथा सारे कर्म ज्ञान में पूर्णतः समाप्त हो जाते हैं।


English

O Vanquisher of Enemies (Arjuna)! The path rooted in Knowledge surpasses those centered on material offerings, {where items such as clarified butter and grains are sacrificed to sacred flames.} This is because all actions are consumed and purified in the enlightening fire of Knowledge {leaving no kārmic residue to bind us to cycles of rebirth}. (4:33)

Commentary

Hindi

द्रव्य-यज्ञ—अर्थात अग्नि में घी, चावल आदि की आहुति देने वाले यज्ञ—में धन लगता है। सभी लोग इसे करने में समर्थ नहीं होते। किन्तु स्वाध्याय-रूपी ज्ञान-यज्ञ में कोई धन नहीं लगता। यह ऐसा यज्ञ है जिसे सभी कर सकते हैं। ज्ञान-यज्ञ का प्रमुख साधन हैं—आध्यात्मिक ग्रंथ, जिनका अध्ययन किया जाता है; जैसे भगवद्-गीता, रामचरितमानस, भागवत-पुराण आदि। भगवद्-गीता और रामचरितमानस तो सहज रूप से सर्वत्र उपलब्ध हैं। भागवत-पुराण में भी यदि थोड़ा धन लगे तो वह एक ही बार लगता है; निर्धन व्यक्ति उन्हें माँगकर भी पढ़ सकते हैं। विद्वानों, संतों और मित्रों से अध्यात्म-ज्ञान की चर्चा करना और सुनना भी निर्धन के लिए सरल और सहज संभव है। यह भी ज्ञान-यज्ञ के अंतर्गत ही आता है। इनका आध्यात्मिक फल उस द्रव्य-यज्ञ से कहीं अधिक होता है जिसमें केवल अग्नि प्रज्वलित कर आहुति दी जाती है।