Jnana Karma Sannyasa Yoga
ज्ञान कर्म संन्यास योग
एवं बहुविधा यज्ञा वितता ब्रह्मणो मुखे। कर्मजान्विद्धि तान्सर्वानेवं ज्ञात्वा विमोक्ष्यसे॥ 4:32॥
एवम् बहु-विधाः यज्ञाः वितताः ब्रह्मणः मुखे, कर्मजान् विद्धि तान्, सर्वान् एवम् ज्ञात्वा वि-मोक्ष्यसे।
एवम् (इस प्रकार) बहु-विधाः (अनेकों प्रकार के) यज्ञाः (यज्ञ) ब्रह्मणः (ब्रह्म के) मुखे (मुख से) वितताः (विस्तार से कहे गए) तान् (उन) सर्वान् (सभी को) कर्मजान् (कर्म से उत्पन्न) विद्धि (जानो) एवम् (इस प्रकार) ज्ञात्वा (जानकर) वि-मोक्ष्यसे (मुक्त हो जाओगे)।
Hindi
इस प्रकार और भी बहुत तरह के यज्ञ ब्रह्म की वाणी में विस्तार से कहे गए हैं। उन सबको तुम कर्म से उत्पन्न जानो। इस प्रकार तत्त्व से जानकर उनके अनुष्ठान द्वारा तुम कर्म-बंधन से मुक्त हो जाओगे।
English
Numerous spiritual paths have been revealed by the Divine, all rooted in human intent and effort. Grasping the essence of these paths grants liberation from worldly shackles. (4:32)