Sankhya Yoga
सांख्य योग
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव। स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम्॥ 2:54॥
स्थित-प्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य, केशव? स्थित-धीः किम् प्रभाषेत, किम् आसीत्, व्रजेत किम्?
(केशव) हे केशव (समाधिस्थस्य) समाधि में स्थित (स्थित-प्रज्ञस्य) स्थित-प्रज्ञ व्यक्ति (का) क्या (भाषा) लक्षण है? (स्थित-धीः) स्थिरबुद्धि व्यक्ति (किम्) कैसे (प्रभाषेत) बोलता है (किम्) कैसे (आसीत्) बैठता है (किम्) कैसे (व्रजेत) चलता है?
Hindi
हे केशव! समाधि में स्थित व्यक्ति, जिसकी प्रज्ञा या बुद्धि दिव्य चेतना में स्थिर ('स्थितधी:') हो गई हो, के क्या लक्षण हैं? वह स्थिरबुद्धि मनुष्य कैसे बोलता है, कैसे बैठता है, और कैसे चलता है?
English
O Keshava! What are the marks of a person whose intelligence has stabilized in the divine consciousness? How does he speak, sit, and walk? (2:54)
Hindi
भगवान ने कई श्लोकों में पूर्व में समत्व-बुद्धि विकसित करने के लिए एकाग्र, एकनिष्ठ और स्थिर होने की बात कही। श्लोक 2:45 में 'निर्द्वंद्व'और 'आत्म-सत्त्वस्थ'—अपने सत्त्व में स्थित होने को कहा, क्योंकि द्वंद्व (दुविधा) बने रहने से एकनिष्ठता नहीं आएगी। निर्द्वंद्व होने से अपने सत्त्व (मूल) में स्थित होने में सुविधा होगी। फिर पिछले श्लोक (2:53) में भी समाधि में स्थित होने को कहा, अर्थात दिव्य चेतना में एकनिष्ठ और एकाग्र हो कर स्थित होने को कहा। इसीलिए अब अर्जुन पूछ रहे हैं कि जिसकी बुद्धि (प्रज्ञा) इस प्रकार दिव्य चेतना में एकनिष्ठ और स्थिर हो जाती है, उसके लक्षण क्या होते हैं। इससे यह स्पष्ट है कि बिना दिव्य चेतना या परमेश्वर की चेतना में गंभीर रूप से स्थित हुए कर्म-योग की प्राप्ति संभव नहीं है। समत्व-बुद्धि का विकास और परमेश्वर के भाव में एकनिष्ठ होकर स्थित होना—ये दोनों भाव एक दूसरे को परिवर्धित-संवर्धित करते रहते हैं, और कर्म-योग में परमसिद्धि की ओर ले जाने में आगे प्रगति प्रदान करते रहते हैं।
English
"Keshava" is another name for Sri Krishna. According to the Padma Purana, this name refers to Krishna's long, beautiful, unshorn hair. It's also one of the many names of Bhagawān Vishnu.