Sankhya Yoga
सांख्य योग
श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला। समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि॥ 2:53॥
श्रुति-वि-प्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला समाधौ अचला बुद्धिः, तदा योगम् अवाप्स्यसि।
श्रुति-वि-प्रतिपन्ना (सुनी गई बातों द्वारा भ्रमित की गई) ते (तुम्हारी) बुद्धिः (बुद्धि) यदा (जब) समाधौ (समाधि में) निश्चला (अचल) अचला (स्थिर) स्थास्यति (हो जाती है) तदा (तब) योगम् (योग को) अवाप्स्यसि (प्राप्त करोगे)।
Hindi
{वेदों-शास्त्रों और अन्य स्रोतों से} सुने हुए तरह-तरह के विचारों से विचलित हुई तुम्हारी बुद्धि जब दिव्य चेतना में एकनिष्ठ होकर स्थिर या एक जगह {परमात्मा में} स्थित हो जाएगी, तब तुम योग—ईश्वर से संयोग—को प्राप्त कर लोगे।
English
Once your wisdom, now confounded, emerges from the {myriad and diverse theories of} the Vedas and stabilizes in the highest divine consciousness, you will attain Yoga. (2:53)