Sankhya Yoga
सांख्य योग
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही।। 2:22॥
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय, नवानि गृह्णाति नरः अपराणि, तथा शरीराणि विहाय जीर्णानि, अन्यानि संयाति नवानि देही।
यथा (जैसे) नरः (मनुष्य) जीर्णानि (पुराने) वासांसि (वस्त्रोंको) विहाय (त्यागकर) अपराणि (दूसरे) नवानि (नये वस्त्रों को) गृह्णाति (ग्रहण करता है) तथा (वैसे ही) देही (जीवात्मा) जीर्णानि (पुराने) शरीराणि (शरीरों को) विहाय (त्यागकर) अन्यानि (दूसरे) नवानि (नये शरीरों को) संयाति (प्राप्त होता है)।
Hindi
जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर दूसरे वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नए शरीरों को धारण करती है।
English
Just as a person discards worn-out garments for new ones, the soul discards old bodies to assume new ones. (2:22)