2:11श्रीभगवानुवाच

Sankhya Yoga

सांख्य योग

Sanskrit Shloka

अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे। गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः॥ 2:11॥

Padacheeda (Word-by-Word)

अ-शोच्यान् अन्व-शोचः त्वम्, प्रज्ञा-वादान् च भाषसे! गतः-असून्, अ-गतः-असून् च, न अनु-शोचन्ति पण्डिताः।

Anvaya (Construction)

त्वम् (तू) अ-शोच्यान् (न शोक करने-योग्य मनुष्योंके लिये) अन्व-शोचः (शोक करता है) च, (और) प्रज्ञा-वादान् (पण्डितो के-से वचनो को) भाषसे (कहता है) गतः-असून् (जिनके प्राण चले गये हैं उनके लिये) च (और) अ-गतः-असून् (जिनके प्राण नहीं गये हैं उनके लिये) पण्डिताः (पण्डितजन) न अनु-शोचन्ति (शोक नहीं करते) ।

Meaning

Hindi

तुम न-शोक-करने-योग्य मनुष्यों के लिए शोक करते हो, और ज्ञानियों-जैसे वचन भी बोलते हो! परंतु जिनके प्राण चले गए हैं, और जिनके प्राण नहीं गए हैं उनके लिए भी, ज्ञानीजन शोक नहीं करते।


English

While you talk like an enlightened one, you grieve for those who deserve no sorrow. The wise lament neither for the living nor for the departed. (2:11)