Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः । स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु॥18:45॥
स्वे-स्वे कर्मणि अभिरतः सम्-सिद्धिम् लभते नरः; स्व-कर्म निरतः सिद्धिम् यथा विन्दति तत् शृणु।
स्वे-स्वे (अपने-अपने) कर्मणि (कर्मों में) अभिरतः (निष्ठापूर्वक लगा हुआ) नरः (मनुष्य) सम्-सिद्धिम् (पूर्ण सफलता) लभते (प्राप्त करता है)। स्व-कर्म (अपने कर्म में) निरतः (लगा हुआ) यथा (जिस प्रकार) सिद्धिम् (सिद्धि को) विन्दति (प्राप्त करता है) तत् (वह) शृणु (सुनो) ।
Hindi
अपने-अपने {स्वभाव के अनुकूल और नियत} कर्मों में तत्परता से लगा हुआ मनुष्य संसिद्धि और सफलता प्राप्त करता है। अपने स्वाभाविक कर्मों में लगा हुआ मनुष्य जिस प्रकार स्वकर्म से सिद्धि प्राप्त करता है, उसे सुनो।
English
People can attain the ultimate {spiritual and worldly} results if engaged in their own work with the fullest sincerity. Listen to how complete attainment comes to a person while remaining engaged in their own occupation or profession. (18:45)