Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम् । विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम् ॥ 18:14॥
अधिष्ठानम् तथा कर्ता, करणम् च, पृथक्-विधम्, विविधाः च पृथक् चेष्टाः, दैवम् च एव अत्र पंचमम्।
अत्र (इस विषय में) अधिष्ठानम् (आधार) च (और) कर्ता (कर्ता) च (और) पृथक्-विधम् (विभिन्न प्रकार के) करणम् (साधन) च (और) विविधाः (विभिन्न) पृथक् चेष्टाः (पृथक-पृथक प्रयत्न) तथा (इस प्रकार) एव (ही) पंचमम् (पाँचवाँ) दैवम् (दैव है) ।
Hindi
अधिष्ठान, कर्ता, अलग-अलग तरह के उपकरण या साधन जिनका प्रयोग किसी कार्य को करने में किया जाता है, एवं अनेक प्रकार की अलग-अलग चेष्टाएँ या प्रयास, और वैसे ही पाँचवाँ दैव (यानी नियति या भाग्य, अथवा देवता या प्रभु की कृपा)—
English
The position or seat of action (adhishthhāna), doer, different kinds of tools or means {which are employed in performing a task}, many different efforts, and Providence (daiva) being the fifth (18:14)—