Daivasura Sampad Vibhaga Yoga
दैवासुर सम्पद विभाग योग
तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता । भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ॥ 16:3॥
तेजः, क्षमा, धृतिः, शौचम्, अद्रोहः, न अति-मानिता— भवन्ति सम्पदम् दैवीम् अभि-जातस्य, भारत!
तेजः (तेज), क्षमा (क्षमा), धृतिः (धैर्य), शौचम् (स्वच्छता-पवित्रता), अद्रोहः (द्वेष-दुर्भावना से मुक्त अवस्था), न-अति-मानिता (अतिमानिता का अभाव), भारत (हे भरतवंशी), दैवीम् (दैवी) सम्पदम् (गुणों को) अभि-जातस्य (लेकर उत्पन्न हुए व्यक्ति के) भवन्ति (होते हैं)।
Hindi
तेज, क्षमा, धीरज, {बाहर और भीतर की} स्वच्छता, द्रोही (विश्वासघाती) स्वभाव का अभाव, अपने लिए अत्यधिक मान-संमान की अभिलाषा नहीं करना—ये सब तो, हे अर्जुन, दैवी गुण (संपदा) को लेकर पैदा हुए मनुष्य के लक्षण हैं।
English
Radiance, forgiveness, endurance, cleanliness, the absence of malevolence, deceit, and disloyalty, and not seeking excessive honor for oneself— all these, O Bhārata, represent the qualities of individuals endowed with divine wealth. (16:3)