Daivasura Sampad Vibhaga Yoga
दैवासुर सम्पद विभाग योग
आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः । ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान्॥ 16:12॥
आशा-पाश-शतैः-बद्धाः, काम-क्रोध-परायणाः; ईहन्ते काम-भोग-अर्थम् अन्यायेन अर्थ सञ्चयान्।
आशा-पाश-शतैः-बद्धाः (आशा के सैकड़ों बंधनों से बंधे हुए), काम-क्रोध-परायणाः (वासना और क्रोध के अधीन), काम-भोग-अर्थम् (भोग की इच्छाओं के लिए) अन्यायेन (अन्यायपूर्वक) अर्थ (धन) सञ्चयान् (संचय को) ईहन्ते (चाहते हैं)।
Hindi
आशा की सैकड़ों रस्सियों से बँधे हुए ये मनुष्य काम-क्रोध में सदा स्थित रहकर विषय-भोगों के लिए अन्याय-पूर्वक धन कमाने और संग्रह करने की इच्छा करते हैं।
English
Trapped in cycles of hundreds of expectations and driven by anger and pleasure, these individuals seek to acquire wealth through unethical means for sensual indulgence. (16:12)
Hindi
यहाँ अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार और व्यवसायियों द्वारा गलत तरीकों से पैसे कमाने की ओर विशेष संकेत है। इस प्रकार अन्यायपूर्ण तरीके से धन कमाने का क्या परिणाम होता है, यह इस अध्याय में बताया गया है — मोक्ष में बाधा, स्वर्ग-प्राप्ति में बाधा, नीच योनियों — अर्थात कीट-पतंग, पशु-पक्षी में पुनर्जन्म, नरक-गमन आदि।