Bhakti Yoga
भक्ति योग
तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनी सन्तुष्टो येन केनचित्। अनिकेतः स्थिरमतिर्भक्तिमान्मे प्रियो नरः॥ 12:19॥
तुल्य-निन्दा-स्तुतिः, मौनी, सन्तुष्टः येन केनचित्, अ-निकेतः, स्थिर-मतिः, भक्ति-मान्, मे प्रियः नरः।।
तुल्य-निन्दा-स्तुतिः (निंदा और प्रशंसा में समभाव रखने वाला), मौनी (मननशील) येन-केनचित् (जिस किसी प्रकार से भी निर्वाह होने में भी) सन्तुष्टः (संतुष्ट रहता हो), अ-निकेतः (रहने के स्थान में आसक्ति से रहित हो), स्थिर-मतिः (स्थिर बुद्धि वाला हो), भक्ति-मान् (भक्तिमान) नरः (व्यक्ति) मे (मुझे) प्रियः (प्रिय है)।
Hindi
जो अपनी निंदा और प्रशंसा को समान भाव से देखता हो, जो कम बोलता हो, जो मननशील हो और जिस-किसी-प्रकार-से-भी निर्वाह होने में संतुष्ट रहता हो तथा जो {अपने} निवास-स्थान {में आसक्ति} से मुक्त हो—वह स्थिरबुद्धि और भक्तिमान मनुष्य मुझको प्रिय है!
English
He who remains indifferent to both praise and blame, observes silence, is content with what naturally comes his way, is not attached to the abode, and has attained mental steadfastness, is a loving devotee I truly cherish; (12:19)