Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
न वेदयज्ञाध्ययनैर्न दानैर्न च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः। शक्य अहं नृलोके द्रष्टुं त्वदन्येन कुरुप्रवीर॥ 11:48॥
न वेद-यज्ञ-अध्ययनैः, न दानैः, न च क्रियाभिः, न तपोभिः उग्रैः, एवम्-रूपः शक्यः अहम् नृ-लोके द्रष्टुम् त्वत्-अन्येन, कुरु-प्रवीर।
कुरु-प्रवीर (कुरुवंश के महान योद्धा)! नृ-लोके (मनुष्य-लोक में) एवं-रूपः (इस प्रकार का रूप वाला) अहम् (मैं) न (नहीं) वेद-यज्ञ-अध्ययनैः (वेदों, यज्ञों और अध्ययन द्वारा) न (न ही) दानैः (दानों से) न (न ही) क्रियाभिः (क्रियाओं से) च (और) न (न ही) उग्रैः (उग्र) तपोभिः (तपों से) त्वत्-अन्येन (तुमसे अन्य किसी के द्वारा) द्रष्टुम् (देखने के लिए)शक्यः (संभव है)।
Hindi
हे कुरुवीर! तुम्हारे {और तुम्हारे-जैसे समर्पित भक्तों के} अतिरिक्त इस मनुष्य लोक में किसी अन्य के द्वारा मैं इस रूप में न वेदाध्ययन, न यज्ञ, न दान, न अन्य धार्मिक क्रियाओं, न ही उग्र तपों द्वारा देखा जा सकता हूँ!
English
The vision of My Cosmic Form, similar to the one you have witnessed, cannot be attained in this human world through Vedic sacrificial ceremonies, study of the Vedas, charity, virtuous deeds, or severe austerities. O, the valiant one among the Kurus! Such a vision is accessible only to {those like} you who have surrendered to Me with loving devotion. (11:48)
Hindi
False
English
यहाँ 'वैदिक यज्ञों' से तात्पर्य है।