Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
यच्चावहासार्थमसत्कृतोऽसि विहारशय्यासनभोजनेषु। एकोऽथवाप्यच्युत तत्समक्षं तत्क्षामये त्वामहमप्रमेयम्॥ 11:42॥
यत् च अव-हास-अर्थम् असत्कृतः असि विहार-शय्या-आसन-भोजनेषु; एकः अथवा अपि अच्युत तत् समक्षम्, तत् क्षामये त्वाम् अहम् अ-प्रमेयम्।
च (और) अच्युत (हे अच्युत)! यत् (जो) अव-हास-अर्थम् (हँसी-मजाक में), विहार-शय्या-आसन-भोजनेषु (विहार-शय्या-आसन और भोजन के क्रम में), एकः (एकांत में) अथवा (या) तत्-समक्षम् (उनके सामने) अपि (भी) असत्कृतः (असत्कृत किए गए) असि (हैं), तत् (वह), अ-प्रमेयम् (हे असीम), त्वाम् (आपसे) अहम् (मैं) क्षामये (क्षमा करवाता हूँ)!
Hindi
हे अच्युत! आप सैर-सपाटे के दौरान, सोने, उठने-बैठने और भोजन के दौरान, अकेले में अथवा अन्य सखाओं के सामने भी, मेरे द्वारा इस प्रकार अवमानित किए गए हैं! प्रभो! मेरे वे सब अपराध अचिंत्य प्रभाव वाले आप क्षमा करेंगे!
English
O, Illimitable Achyuta (Krishna)! I seek forgiveness for any lack of reverence I may have displayed toward you, whether in jest, while walking, sitting, resting, or during meals, whether in private or in the presence of others! (11:42)
Hindi
False