Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं हे कृष्ण हे यादव हे सखेति। अजानता महिमानं तवेदं मया प्रमादात्प्रणयेन वापि॥11:41॥
सखा इति मत्वा, प्रसभम् यत् उक्तम्— "हे कृष्ण", "हे यादव", "हे सखे", इति; अजानता महिमानम् तव इदम्, मया प्रमादात् प्रणयेन वा अपि।
तव (आपकी) इदम् (यह) महिमानम् (महिमा) अजानता (न जानते हुए) सखा (मित्र) इति (ऐसा) मत्वा (समझकर) प्रणयेन (प्रेम से) वा (या) प्रमादात् (लापरवाही से) अपि (भी) मया (मेरे द्वारा) हे कृष्ण (हे कृष्ण), हे यादव (हे यादव), हे सखे (हे मित्र), इति (ऐसा) यत् (जो) प्रसभम् (अचानक) उक्तम् (कहा गया),
Hindi
आपके महान और दिव्य प्रभाव से अनजान, आप सखा हैं, ऐसा मानकर, प्रेम से अथवा प्रमाद से भी मैंने ‘हे कृष्ण !’ ‘हे यादव!’ ‘हे सखे!’, इस प्रकार आपको संबोधित किया!
English
Treating you as my friend, unaware of your divine stature, I have spoken to you in familiarity, saying, "O, Krishna, O, Yādava, O, buddy," out of affection or perhaps ignorance. (11:41)
Hindi
False