Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी। नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य॥ 11:35॥
एतत् श्रुत्वा वचनम् केशवस्य, कृत-अञ्जलिः वेपमानः किरीटी; नमः-कृत्वा भूयः एव आह कृष्णम् स-गद्-गदम् भीत-भीतः प्रणम्य।
केशवस्य (केशव का) एतत् (यह) वचनम् (वचन) श्रुत्वा (सुनकर) किरीटी (मुकुटधारी) कृत-अञ्जलिः (दोनों हाथ जोड़कर) वेपमानः (काँपते हुए) नमः-कृत्वा (नमस्कार करते हुए) भूयः एव (फिर भी) भीत-भीतः (भयभीत हुआ) प्रणम्य (प्रणाम करके) कृष्णम् (कृष्ण को)स-गद्-गदम् (गद-गद होकर) आह (बोला)।
Hindi
केशव के इन वचनों को सुनकर काँपता हुआ डरा-डरा-सा अर्जुन हाथ जोड़कर प्रणाम करता हुआ श्रीकृष्ण से गदगद स्वरों से बोला–
English
After hearing these words from Keshava, Arjuna, the crowned one, trembling with fear, repeatedly paid his respects to Krishna with folded hands and spoke in a contented voice. (11:35)
Hindi
False