Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान्। मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठा युध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान्॥ 11:34॥
द्रोणम् च भीष्मम् च जयद्रथम् च, कर्णम् तथा अन्यान् अपि योध-वीरान्। मया हतान् त्वम्, जहि मा व्यथिष्ठाः; युध्यस्व जेता असि रणे सपत्नान्।।
द्रोणम् (द्रोण), भीष्मम् (भीष्म), जयद्रथम् (जयद्रथ), कर्णम् (कर्ण)तथा (और) अन्यान् (अन्य) अपि (भी) मया (मेरे द्वारा) हतान् (मारे हुए) योध-वीरान् (वीर योद्धाओं को) त्वम् (तुम) जहि (मार डालो), मा (मत) व्यथिष्ठाः (चिंतित न हो)! रणे (युद्ध में) सपत्नान् (विरोधियों को) जेता असि (जीतोगे)! युध्यस्व (युद्ध करो)!
Hindi
द्रोण, भीष्म, जयद्रथ, कर्ण तथा मेरे द्वारा मारे जा चुके अन्य सभी वीर योद्धाओं को तुम अब मृत्यु को समर्पित कर डालो! भय न करो! युद्ध में इन सभी शत्रुओं को तुम पराजित करोगे! {उठो अर्जुन, युद्ध करो, युद्ध करो!!}
English
Bestow death upon Drona, Bhishma, Jayadratha, Karna, and other mighty warriors I have already slain. Shed your fear and fight! You shall conquer your enemies in the battle! (11:34)
Hindi
False