Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः। ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताःप्रत्यनीकेषु योधाः॥ 11:32॥
कालः अस्मि लोक-क्षय-कृत् प्रवृद्धः, लोकान् समाहर्तुम् इह प्रवृत्तः; ॠते अपि त्वाम् न भविष्यन्ति सर्वे ये अव-स्थिताः प्रति अनीकेषु योधाः।
लोक-क्षय-कृत् (लोकों का विनाश करने वाला) प्रवृद्धः (प्रवृत्त हुआ) कालः (समय या काल) अस्मि (मैं हूँ) इह (इस समय) लोकान् (लोकों का) समाहर्तुम् (विनाश करने के लिए) प्रवृत्तः (प्रवृत्त हुआ हूँ) ये (जो) प्रति-अनीकेषु (प्रतिपक्षियों की सेना में) अव-स्थिताः (स्थित) योधाः (योद्धा हैं) सर्वे (सभी) त्वाम् (आपको) ॠते (बिना) अपि (भी) न (नहीं) भविष्यन्ति (रहेंगे)।
Hindi
मैं लोगों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ काल हूँ—मृत्यु हूँ, मृत्युमय समय हूँ—जो इस समय इन लोगों को नष्ट करने के लिए प्रवृत्त हुआ हूँ! जो विरोधियों की सेना के योद्धा हैं, तुम उनसे युद्ध करो या न करो, इनकी मृत्यु सुनिश्चित है!
English
I am Time—the great annihilator of the worlds—grown mature to decimate all the people. Even without you {participating in the battle}, all the warriors in the opposing armies shall perish. (11:32)
Hindi
True
English
यह प्रसिद्ध है कि जब ऐटम बम के निर्माता जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर ने 1945 में न्यू मेक्सिको ट्रिनिटी टेस्ट साइट में ऐटम बम का पहला विस्फोट किया और आकाश में अदम्य प्रकाश वाला आग का विशाल जाज्वल्यमान गोला उठा, तो उन्हें भगवद्-गीता का यही श्लोक याद आया! पैदाइश से यहूदी होने के बावजूद ओपनहाइमर भगवद्-गीता के बड़े प्रेमी, अध्येता और प्रशंसक रहे थे। महाभारत के युद्ध की पृष्ठभूमि से यह स्पष्ट है कि भगवद्-गीता युद्ध और हिंसा को अंतिम अस्त्र मानती है, और युद्ध के पूर्व सहनशीलता और संवाद को आवश्यक मानती है। श्रीकृष्ण समस्याओं के समाधान के लिए और युद्ध रोकने के लिए खुद ही शांति-दूत बनकर कौरवों की सभा में गए थे, मगर दुर्योधन नहीं माना — इसलिए युद्ध हुआ। भगवान युद्ध के मैदान में भी, इस युद्ध को अनिवार्य मानने के बावजूद, बार-बार अहिंसा का उपदेश देते हैं। इसलिए आणविक अस्त्रों के दुष्प्रयोग के लिए भगवद्-गीता में समर्थन ढूँढ़ना गलत है। ओपनहाइमर को भी जब इस श्लोक की सहसा याद आई, तो उन्होंने अपने अभूतपूर्व अनुभव को इस श्लोक के बहाने एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी! मगर भगवद्-गीता का उन्होंने आणविक अस्त्रों के समर्थन में प्रयोग किया हो — ऐसा कभी सामने नहीं आया।