Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद । विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्॥ 11:31॥
आख्याहि मे, कः भवान् उग्र-रूपः? नमः अस्तु ते देव-वर प्रसीद! वि-ज्ञातुम् इच्छामि भवन्तम् आद्यम्, न हि प्र-जानामि तव प्र-वृत्तिम्।।
मे (मुखे) आख्याहि (बताइए) भवान् (आप) उग्र-रूपः (उग्र रूप) कः (कौन हैं) देव-वर (हे देवताओं में श्रेष्ठ), ते (आपको) नमःअस्तु (नमस्कार हो), प्रसीद (प्रसन्न हों)! आद्यम् (आदि पुरुष), भवन्तम् (आपको) वि-ज्ञातुम् (जानने के लिए) इच्छामि (इच्छा करता हूँ), हि (क्योंकि) तव (आपकी) प्र-वृत्तिम् (प्रवृत्ति) न (नहीं) प्र-जानामि (जानता हूँ)।
Hindi
कृपया कहिए कि उग्ररूप वाले यह आप कौन हैं? हे देवों में श्रेष्ठ! आपको प्रणाम है, कृपा करेंं! आदिस्वरूप आपको मैं जानने की इच्छा रखता हूँ, क्योंकि आपकी वृत्ति मेरे लिए अबूझ हो रही है!
English
Tell me who you are with a demeanor so furious. Salutation to you, O, the Highest and Primal among deities! Have mercy! I wish to know who you really are, for I do not know your design. (11:31)
Hindi
False