Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः। तथैव नाशाय विशन्ति लोकास्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः॥ 11:29॥
यथा प्र-दीप्तम् ज्वलनम् पतङ्गाः विशन्ति नाशाय समृद्ध-वेगाः, तथा-एव नाशाय विशन्ति लोकाः तव अपि वक्त्राणि समृद्ध-वेगाः।
यथा (जैसे) पतङ्गाः (पतंगे) नाशाय (नाश के लिए) प्र-दीप्तम् (प्रज्वलित), ज्वलनम् (अग्नि में) समृद्ध-वेगाः (तेज गति से) विशन्ति (प्रवेश करते हैं) तथा-एव (वैसे ही) लोकाः (लोग) अपि (भी) नाशाय (नाश के लिए) तव (आपके) वक्त्राणि (मुखों में) समृद्ध-वेगाः (तेज गति से) विशन्ति (प्रवेश करते हैं)।
Hindi
जैसे फतिंगे नष्ट होने के लिए प्रज्वलित अग्नि में तेजी से प्रवेश करते हैं, वैसे ही {इस रणभूमि में उपस्थित} सब लोग अपने विनाश के लिए आपके मुखों में वेग से घुसे जा रहे हैं!
English
Like moths rush full speed into a burning flame inviting self-destruction, so are people seen rushing full speed into your mouths, seeking death and devastation. (11:29)
Hindi
False