Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान्। ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थमृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान्॥ 11:15॥
पश्यामि देवान् तव देव देहे सर्वान् तथा भूत-विशेष-सङ्घान्, ब्रह्माणम् ईशम् कमल-आसनस्थम्, ॠषीन् च सर्वान् उरगान् च दिव्यान्।
देव (हे देव!) तव (आपके) देहे (शरीर में) सर्वान् (सभी) देवान् (देवताओं) तथा (और) भूत-विशेष-सङ्घान् (भूत-समुदाय), कमल-आसनस्थम् (कमल के आसन पर स्थित) ब्रह्माणम् (ब्रह्मा), ईशम् (ईश) च (और) सर्वान् (सभी) ॠषीन् (ऋषियों) च (और) दिव्यान् (दिव्य) उरगान् (सर्पों को) पश्यामि (देखता हूँ)।
Hindi
भगवन! मैं आपकी विराट काया में समस्त देवताओं, प्राणियों, ॠषियों तथा दिव्य सर्पों-सहित कमलासन-स्थित बह्मा तथा ईश (महेश) को भी देख रहा हूँ।
English
O God, within your form, I perceive all the deities, various kinds of beings, Brahmā seated upon the lotus throne, Mahesh, the foremost Rudra, and the great sages and divine serpents. (11:15).
Hindi
False