8:7श्रीभगवानुवाच

Akshara Brahma Yoga

अक्षर ब्रह्म योग

Sanskrit Shloka

तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्॥ 8:7॥

Padacheeda (Word-by-Word)

तस्मात् सर्वेषु कालेषु, माम् अनु-स्मर युध्य च, मयि अर्पित-मनः-बुद्धिः, माम् एव एष्यसि अ-संशयम्।

Anvaya (Construction)

तस्मात् (इसलिए) सर्वेषु (सभी) कालेषु (समयों में) माम् (मुझे) अनु-स्मर (स्मरण करो) च (और) मयि (मुझमें) अर्पित-मनः-बुद्धिः (मन और बुद्धि को अर्पित करके) युध्य (युद्ध करो, तो) अ-संशयम् (निःसंदेह) माम् (मुझे) एव (ही) एष्यसि (प्राप्त करोगे)।

Meaning

Hindi

इसलिए तुम सब समय मेरा स्मरण करो और युद्ध भी करो। इस प्रकार मुझमें समर्पित मन-बुद्धि से युक्त होकर तुम अवश्य मुझको ही प्राप्त करोगे।


English

Hence, always maintain your remembrance of Me, even in the heat of battle. With your heart and mind fully devoted to Me and no one else, you shall undoubtedly reach Me. (8:7)

Commentary

Hindi

सब समय ईश्वर का स्मरण सरल नहीं है। इसलिए भक्त अलग-अलग उपाय ग्रहण करते हैं। कुछ साँसों की लय के साथ ईश्वर के नाम का सामंजस्य बिठा लेते हैं, और कुछ दिन अभ्यास (जिसका निर्देश भगवान श्लोक 8:8 में देते हैं) करने के बाद वह नाम स्वयं ही साँसों के साथ उच्चारित होता रहता है—जैसे, साँस अंदर आई तो 'सो' और बाहर आई तो 'हं'—इस प्रकार हर साँस के साथ 'सोऽहं' ('मैं वही हूँ') पूरा हो गया। यद्यपि यह उच्चारण मन-ही-मन स्वयं ही होता रहता है, तथापि साधक का ध्यान ईश्वर की ओर बार-बार जाता रहता है। कुछ लोग 'राम' या 'ॐ' का साँसों के साथ ऐसा ही सामंजस्य बिठा लेते हैं। कुछ भक्त घर में अपने साथ बाल-गोपाल का एक छोटा-सा विग्रह (तीन-चार इंच की मूर्ति) रख लेते हैं और बच्चे की तरह सुबह से रात तक उन्हें खिलाने-पिलाने, नहलाने-धुलाने-सुलाने में अपने रोज़मर्रा के कामों के बीच-बीच में लगे रहते हैं, जिससे प्रभु का सतत स्मरण होता रहता है। कुछ भक्त दिन भर हल्की ध्वनि में प्रभु का नाम बजाते रहते हैं, ताकि वह कानों में पड़ता रहे और प्रभु का लगातार स्मरण होता रहे।