Jnana Vijnana Yoga
ज्ञान विज्ञान योग
वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन। भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन॥ 7:26॥
वेद अहम् सम्-अतीतानि, वर्तमानानि च अर्जुन, भविष्याणि च भूतानि, माम् तु वेद न कश्चन।
अर्जुन (हे अर्जुन)! सम्-अतीतानि (सभी अतीत) वर्तमानानि (वर्तमान) भविष्याणि (भविष्य) भूतानि (प्राणी) अहम् (मैं) वेद (जानता हूँ) तु (परंतु) माम् (मुझे) कश्चन (कोई) न (नहीं) वेद (जानता)।
Hindi
हे अर्जुन! भूतकाल और वर्तमानकाल तथा भविष्यकाल के सब प्राणियों को मैं जानता हूँ, परंतु मुझको कोई भी {सामान्यतः} नहीं जानता।
English
I am aware of all beings—past, present, and future, O, Arjuna. However, none among them truly knows Me. (7:26)
Hindi
इसी अध्याय के श्लोक 3 और 29 के साथ इस श्लोक को पढ़ेंगे तो 'मुझे कोई नहीं जानता' को — 'सामान्यतः कोई नहीं जानता; केवल सुदुर्लभ ब्रह्मभूत सिद्ध योगी ही जानते हैं' — इस अर्थ में लेना होगा।
English
When this verse is considered alongside verses 3 and 29 from the same chapter, the interpretation of “Me no one knows” can be understood as “No ordinary mortal knows Me” or “In the ordinary sense, no one comprehends Me, except for a few exceptionally accomplished Yogis.”