Karma Sannyasa Yoga
कर्म संन्यास योग
सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि। यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्॥ 5:1॥
सन्न्यासम् कर्मणाम् कृष्ण, पुनः योगम् च शंससि; यत् श्रेयः एतयो: एकम्, तत् मे ब्रूहि सु-निश्चितम्।।
कृष्ण (हे कृष्ण)! कर्मणाम् (कर्मों का) सन्न्यासम् (त्याग) च (और) पुनः (फिर से) योगम् (योग की) शंससि (प्रशंसा करते हैं) एतयोः (इन दोनों में से) यत् (जो) एकम् (एक) मे (मेरे लिए) सु-निश्चितम् (सुनिश्चित) श्रेयः (श्रेष्ठ) तत् (उसे) ब्रूहि (कहिए)।
Hindi
हे श्रीकृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की अर्थात कर्मों को छोड़ने की और फिर कर्म-योग की या कर्मों से जुड़ने की प्रशंसा करते हैं, इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे लिए निश्चित कल्याण-कारक हो, उसको कहिए।
English
{O, Krishna!} On the one hand, you talk of renunciation (sannyāsa) of actions, and on the other, you praise action (Karma Yoga). Tell me for sure which of the two is more desirable. (5:1)