Jnana Karma Sannyasa Yoga
ज्ञान कर्म संन्यास योग
तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः। छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत॥ 4:42॥
तस्मात् अज्ञान-सम्-भूतम् हृत्-स्थम् ज्ञान-असिना आत्मनः, छित्त्वा एनम् संशयम्, योगम् आ-तिष्ठ, उत्-तिष्ठ, भारत!
तस्मात् (इसलिए) भारत (हे भरतवंशी)! हृत्-स्थम् (हृदय में स्थित) एनम् (इस) अज्ञान-सम्-भूतम् (अज्ञान से उत्पन्न) आत्मनः (अपने) संशयम् (संशय का) ज्ञान-असिना (ज्ञान के तलवार से) छित्त्वा (नष्ट करके) योगम् (योग में) आ-तिष्ठ (स्थिर हो) उत्-तिष्ठ (उठो)।
Hindi
इसलिए, हे अर्जुन! तुम हृदय में स्थित अज्ञान से पैदा हुए अपने संशय को ज्ञान-विवेक-रूप तलवार द्वारा काट कर {कर्म-} योग पर आरूढ़—सवार और अच्छी प्रकार स्थित—हो जाओ, और युद्ध के लिए खड़े हो जाओ।
English
Hence, O Descendant of King Bharata! Wield the sword of spiritual wisdom to cut through the doubt born of ignorance in your heart. Embrace {Karma-} Yoga and stand ready for the battle. (4:42)