Jnana Karma Sannyasa Yoga
ज्ञान कर्म संन्यास योग
वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः। बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः॥ 4:10॥
वीत-राग-भय-क्रोधाः, मत्-मयाः, माम् उपाश्रिताः, बहवः ज्ञान-तपसा पूताः, मत्-भावम् आगताः।
वीत-राग-भय-क्रोधाः (राग, भय, और क्रोध से मुक्त) मत्-मयाः (मेरे द्वारा प्रेरित) माम् (मेरे) उपाश्रिताः (आश्रय में रहने वाले) बहवः (बहुत-से) ज्ञान-तपसा (ज्ञान और तपस्या द्वारा) पूताः (पवित्र) मत्-भावम् (मेरे आत्मभाव को) आगताः (प्राप्त हो चुके हैं)।
Hindi
मुक्त हो चुके थे जो राग (आसक्ति), भय और क्रोध से, जो पूर्णतया मुझमें रमे रहते थे, ऐसे मेरे आश्रित रहने वाले बहुत-से मनुष्य उपर्युक्त ज्ञान-रूप तप से, {अर्थात मेरे वास्तविक स्वरूप का ज्ञान प्राप्त कर} और इस ज्ञान से पवित्र होकर, मेरे भाव (स्वरूप) को प्राप्त हो चुके हैं।
English
Numerous devotees, who, having liberated themselves from attachment, fear, and anger, have sought refuge in Me remaining fully immersed in Me, have purified their souls with the knowledge of Me, and have in the past been drawn into My Being. (4:10)