Karma Yoga
कर्म योग
काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥ 3:37॥
कामः एषः क्रोधः एषः रजोगुण-सम्-उद्भवः, महा-अशनः महा-पाप्मा विद्धि एनम् इह वैरिणम्।।
रजोगुण-सम्-उद्भवः (रजोगुण से उत्पन्न) एषः (यह) कामः (कामना) क्रोधः (क्रोध है) एषः (यह) महा-अशनः (महान भक्षक) महा-पाप्मा (महान पापकारी) एनम् (इसे) इह (यहां) वैरिणम् (शत्रु) विद्धि (जानो)।
Hindi
रजोगुण से उत्पन्न हुई यह कामना ही क्रोध है। यह कामना बहुत खाने वाली, अर्थात भोगों से कभी न अघाने वाली, और बहुत पापी है। इसे ही इस संसार में वैरी जानो।
English
Desires and anger, born of the Passional Mode of Nature (RajoGuna) are the all-devouring evil forces {which force one to commit sins against their will}. Know them to be the enemy here {within yourself}. (3:37)
Hindi
श्लोक 3:36 में पूछे गए अर्जुन के प्रश्न का यह उत्तर है– कामना से ही प्रेरित होकर मनुष्य न चाहते हुए भी बलपूर्वक पापकर्म में नियोजित होता है, यानी पापकर्म में लगता है।
English
In the verse, 'all-devouring' would mean "consuming even wisdom and the ability to discern right from wrong."