Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत । स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव॥ 18:73॥
नष्टः मोहः, स्मृतिः लब्धा, त्वत् प्रसादात् मया, अ-च्युत! स्थितः अस्मि गत-सन्देहः, करिष्ये वचनम् तव।
अच्युत (हे अच्युत कृष्ण)! त्वत्-प्रसादात् (आपकी कृपा से) मोहः (मोह) नष्टः (नष्ट हो गया है)। मया (मेरे द्वारा) स्मृतिः (स्मृति) लब्धा (प्राप्त कर ली गई है)। गत-सन्देहः (संदेह मुक्त हुआ) स्थितः अस्मि (मैं स्थिर हूँ); तव (आपके) वचनम् (वचन का) करिष्ये (पालन करूँगा)।
Hindi
हे अच्युत श्रीकृष्ण! आपकी कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया, और मैंने {अपने धर्म की, कर्तव्य की} स्मृति प्राप्त कर ली है। अब मैं संदेह-रहित हूँ, और आपके वचनों का पालन करूँगा।
English
O Achyuta, by your divine Grace, my attachments and confusion have been dispelled. I have regained the clarity of mind. My doubts are no more, and I shall steadfastly follow your guidance. (18:73)