Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः । पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः॥ 18:16॥
तत्र एवम् सति कर्तारम् आत्मानम् केवलम् तु यः पश्यति अकृत-बुद्धित्वात्, न सः पश्यति दुर्मतिः।
तु (परंतु) एवम् (इस प्रकार) सति (होने पर भी) यः (जो) अकृत-बुद्धित्वात् (अशुद्ध बुद्धि के कारण) तत्र (वहाँ) केवलम् (सिर्फ) आत्मानम् (स्वयं को) कर्तारम् (कर्ता) पश्यति (देखता है), सः (वह) दुर्मतिः (मलिन विचार वाला) न (नहीं) पश्यति (देखता)।
Hindi
वास्तविक स्थिति ऐसी होने पर भी {कि पाँच कारण होते हैं सफलता के}, जो परिष्कृत बुद्धि न होने के कारण यह समझे कि मैं अकेला ही कर्ता हूँ, वह दुर्मति (बुरी मति या बुद्धि वाला व्यक्ति) कुछ भी नहीं जानता।
English
However, those with limited understanding may mistakenly believe that they are the sole agents responsible for their actions and their outcomes, failing to recognize the deeper truth. (18:16)