15:4श्रीभगवानुवाच

Purushottama Yoga

पुरुषोत्तम योग

Sanskrit Shloka

ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गता न निवर्तन्ति भूयः। तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी॥ 15:4॥

Padacheeda (Word-by-Word)

ततः पदम् तत् परि-मार्गितव्यम्, यस्मिन् गताः न नि-वर्तन्ति भूयः; तम् एव् च आद्यम् पुरुषम् प्रपद्ये, यतः प्र-वृत्तिः प्र-सृता पुराणी।।

Anvaya (Construction)

ततः (उसके बाद) तत् (उसका) पदम् (पद का) परि-मार्गितव्यम् (चारों ओर से मार्ग तलाशना चाहिए) यस्मिन् (जिसमें) गताः (गए हुए) भूयः (फिर) न (नहीं) नि-वर्तन्ति (वापस आते) च (और) यतः (जिससे) पुराणी (पुरातन) प्र-वृत्तिः (गतिविधि) प्र-सृता (प्रसारित हुई) तम् एव आद्यम् पुरुषम् (उसी आदि पुरुष के) प्रपद्ये (की शरण ग्रहण करता हूँ)।

Meaning

Hindi

फिर सभी ओर से उस स्थान के मार्ग तलाशने चाहिए, जहाँ पहुँच कर पुनः लौटकर संसार में नहीं आना पड़ता, और यह संकल्प करना चाहिए कि सृष्टि-क्रम की यह पुरातन गतिविधि जिससे उत्पन्न हुई है, उसी आद्यपुरुष परमेश्वर की ओर मैं जाता हूँ, उन्हीं की शरण ग्रहण करता हूँ।


English

One should try to find the Destination upon reaching which one is no longer obligated to return to the world. After that, one should resolve thus: "I seek refuge in that {Destination}—the Primeval Being (God)—from whom this olden cosmic process arose and expanded." (15:4)

Commentary

Hindi

भगवद् गीता ईश्वर-प्राप्ति के लिए सिर्फ मार्ग तलाशने के लिए नहीं कहती; यह सारे मार्ग स्वयं बतलाती भी है। उन मार्गों का एकत्र अध्ययन करने के लिए इस पुस्तक के आरंभिक प्रस्तावना खंड में ईश्वर की ओर ले जाने वाले दस मार्गों पर निबंध देखें।