14:8श्रीभगवानुवाच

Gunatraya Vibhaga Yoga

गुणत्रय विभाग योग

Sanskrit Shloka

तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत॥ 14:8॥

Padacheeda (Word-by-Word)

तमः तु अज्ञानजम् विद्धि मोहनम् सर्व-देहिनाम्; प्रमाद-आलस्य-निद्राभिः तत् नि-बध्नाति, भारत!

Anvaya (Construction)

भारत (हे भरतवंशी)! सर्व-देहिनाम् (सभी देहधारियों को) मोहनम् (मोहित करने वाले) तमः (तमस को) तु (तो) अज्ञानजम् (अज्ञान से उत्पन्न) विद्धि (जानो)। तत् (वह) प्रमाद-आलस्य-निद्राभिः (अविचार, आलस्य और निद्रा से) नि-बध्नाति (बाँधता है)।

Meaning

Hindi

और हे भरतपुत्र! तमोगुण को अज्ञान से उत्पन्न जानो, जो समस्त देहधारी जीवों को मोहित करने वाला है। वह प्रमाद (कर्तव्य की विस्मृति, लापरवाही, उन्मत्तता), आलस्य और नींद द्वारा जीवों को बाँधता है।


English

And O, Bhārata! Know that the TamoGuna, imbued with Ignorance, deludes all beings. It binds them to carelessness, indifference to duties, lunacy, laziness, and slumber. (14:8)

Commentary

Hindi

भागवतपुराण तमोगुण की वृत्तियाँ थोड़े विस्तार से इस प्रकार बताताहै—'क्रोध', 'लोभ', 'झूठ बोलना', 'हिंसा', 'याचना', 'दंभ', 'कलह', 'शोक', 'मोह', 'विषाद', 'दीनता', 'निद्रा', 'आशा', 'भय' और 'अकर्मण्यता' आदि। (श्लोक 4, अध्याय 25, एकादश स्कंध, भागवतपुराण)


English

The Bhāgawata Purāna describes the signs of RajoGuna, the Passional Mode of Nature, in further detail—anger (क्रोध), greed (लोभ), lying (झूठ बोलना), violence (हिंसा), begging (याचना), conceit (दंभ), discord (कलह), mourning (शोक), delusion (मोह), grieving (विषाद), helplessness (दीनता), sleepiness (निद्रा), hope (आशा), fear (भय) and inaction (अकर्मण्यता), etc. (Verse 4, Ch. 25, Eleventh Skandha, Bhāgawata Purāna.)