Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना । अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे॥ 13:24॥
ध्यानेन आत्मनि पश्यन्ति केचित् आत्मानम् आत्मना। अन्ये साङ्ख्येन योगेन, कर्म-योगेन च अपरे।।
आत्मानम् (आत्मा को) केचित् (कुछ लोग) आत्मना (आत्म के द्वारा) ध्यानेन (ध्यान से) आत्मनि (आत्म में) पश्यन्ति (देखते हैं), अन्ये (कुछ अन्य) साङ्ख्येन योगेन (सांख्य योग द्वारा) च (और) अपरि (कुछ अन्य) कर्म-योगेन (कर्म योग द्वारा)।
Hindi
आत्मा को कितने ही लोग तो ध्यान के द्वारा अपने अंदर देखते हैं, अन्य कितने ही दार्शनिक विवेचना के द्वारा और योग-पद्धति के द्वारा, तथा दूसरे कर्म-योग के द्वारा देखते हैं, उसका ज्ञान प्राप्त करते हैं।
English
To discern the Self (soul) in the self (heart) by the self (purified mind), some men follow the Path of Meditation, others the Path of Knowledge, and still, others the Path of Unattached Action. (13:24)