Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग
इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते । एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः॥ 13:1॥
इदम् शरीरम् कौन्तेय, क्षेत्रम् इति अभि-धीयते; एतत् यः वेत्ति, तम् प्राहुः क्षेत्रज्ञः इति तत्-विदः ।।
कौन्तेय (हे कुंतीपुत्र)! इदम् (यह) शरीरम् (शरीर) क्षेत्रम् (क्षेत्र) इति (इस प्रकार) अभि-धीयते (कहा जाता है); एतत् (यह) यः (जो) वेत्ति (जानता है), तम् (उसे) क्षेत्रज्ञः (क्षेत्रज्ञ) इति (इस प्रकार) तत्-विदः (उसे जानने वाले) प्राहुः (कहते हैं)।
Hindi
हे कौन्तेय! यह शरीर क्षेत्र कहा जाता है और इसको जो जानता है, उसे तत्त्वज्ञ जन क्षेत्रज्ञ कहते हैं।
English
O, Son of Kunti! By the knowers of the Truth, this body is called a "Field" (where good and evil acts are sown and reaped). The one who knows the Field is called by them the "Knower of the Field." (13:1)