Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
कस्माच्च ते न नमेरन्महात्मन्गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे। अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत्॥ 11:37॥
कस्मात् च ते न नमेरन् महा-आत्मन् गरीयसे ब्रह्मणः अपि आदि कर्त्रे! अनन्त देव-ईश जगत्-निवास, त्वम् अक्षरम्, सत्-असत्, तत्-परम् यत्।
महा-आत्मन् (हे महान आत्मा)! ब्रह्मणः (ब्रह्मा के) अपि (भी) आदि (आदि) कर्त्रे (सर्जक) च (और) गरीयसे (सबसे महान) ते (आप के लिए) कस्मात् (कैसे) न (नहीं) नमेरन् (नमस्कार करें); अनन्त (हे अनंत)! देव-ईश (हे देवताओं के ईश्वर)! जगत्-निवास (हे सारी सृष्टि के निवास)! यत् (जो) सत्-असत् (सत्-असत्) तत्-परम् (और उनसे परे) अक्षरम् (अक्षय है) त्वम् (आप हैं)।
Hindi
महात्मन! ब्रह्मा के भी जनक और सबों से श्रेष्ठ, देवों के देव, आपको वे सिद्धगण नमस्कार क्यों न करें! हे अनंत! हे जगत के आश्रय! जो सत-असत से परे अक्षर-अविनाशी ब्रह्म है, वह आप ही तो हैं!
English
O, Eternal One! O, God of gods! O, Refuge of the universe—the One transcending good and evil, the Imperishable! Why should the spiritually awakened not pay their respects to you, O, Exalted One! Who is greater than you—the original Creator, even of Brahmā! (11:37)
Hindi
True