Vishwarupa Darshana Yoga
विश्वरूप दर्शन योग
एवमेतद्यथात्थ त्वमात्मानं परमेश्वर । द्रष्टुमिच्छामि ते रूपमैश्वरं पुरुषोत्तम॥ 11:3॥
एवम् एतत् यथा आत्थ त्वम् आत्मानम् परमेश्वर, द्रष्टुम् इच्छामि ते रूपम् ऐश्वरम् पुरुषोत्तम!
परमेश्वर (हे परमेश्वर)! त्वम् (आप) आत्मानम् (स्वयं को) यथा (जैसा) आत्थ (बताते हैं) एतत् (यह) एवम् (ऐसा ही है)! पुरुषोत्तम (हे पुरुषोत्तम)! ते (आपके) ऐश्वरम् (ऐश्वर्य) रूपम् (रूप को) द्रष्टुम् (देखना) इच्छामि (चाहता हूँ)!
Hindi
हे परमेश्वर ! आपने अपने को जैसा बताया, यह निश्चय ही ऐसा ही है, किंतु हे पुरुषोत्तम ! आपके ईश्वरीय रूप के मैं प्रत्यक्ष दर्शन करना चाहता हूँ।
English
O, God-the-Supreme! You are truly as you declare yourself! Yet, I wish to behold your majesty, O, Purushottama (Krishna)! (11:3)
Hindi
True
English
दसवें अध्याय में भगवान ने अपने ऐश्वर्य का जिक्र किया, और अंत में कहा कि वे अपने एक अंश से ही सारे ब्रह्मांड को धारण करके स्थित हैं। यह सुनकर अर्जुन के मन में उनके उस विराट विश्वरूप को देखने की इच्छा जगी।