1:39अर्जुन उवाच

Arjuna Vishada Yoga

अर्जुन विषाद योग

Sanskrit Shloka

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्। कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥ 1:39॥

Padacheeda (Word-by-Word)

कथम् न ज्ञेयम् अस्माभिः पापात् अस्मात् निवर्तितुम्कु ल-क्षय-कृतम् दोषम् प्र-पश्यद्भिः जनार्दन।

Anvaya (Construction)

जनार्दन (हे जनार्दन)! कुल-क्षय-कृतम् (कुल का नाश करने से होने वाले) दोषम् (दोष को) प्र-पश्यद्भिः (ठीक-ठीक जानने वाले) अस्माभिः (हम लोग) अस्मात् (इस) पापात् (पाप से) निवर्तितुम् (निवृत्त होने का) कथम् (क्यों) ज्ञेयम् (विचार) न (न करें)?

Meaning

Hindi

हालाँकि लोभ से ग्रस्त चित्त वाले हुए ये लोग कुल के विनाश से पैदा होने वाले दोष और मित्र-द्रोह से लगने वाले पाप को नहीं देख पा रहे, तो भी, हे जनार्दन! कुल के विनाश से उत्पन्न होने वाले दोषों को हमलोग तो जानते-समझते हैं! फिर हम लोगों को इस पाप से निवृत्त होने के लिए क्योंं नहीं विचार करना चाहिए?


English

Blinded by greed, they might not see the impending disaster of family extinction nor the harm in betraying allies. But why should we, aware of the aftermath of familial collapse, partake in such heinous actions? (1:38-39)