अपनी सफलता और अपने विकास के उपकरण हम बाहर की दुनिया में खोजते फिरते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि उसकी सबसे बड़ी चाबी तो हमारे अंदर ही छिपी हुई है। यह चाबी है आत्म जागरूकता।
आत्म जागरूकता का अर्थ है अपने आप को गहराई से जानना — अपने विचारों, भावनाओं, प्रतिक्रियाओं और व्यवहार के प्रतिमानों को समझना।
भगवद् गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने आत्म ज्ञान को सबसे उच्च ज्ञान बताया है। जब हम अपने आप को जानते हैं, तब हम अपनी अंदरूनी शक्तियों को जगा सकते हैं।
