Jnana Vijnana Yoga
ज्ञान विज्ञान योग
साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः। प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः॥ 7:30॥
स-अधि-भूत अधि-दैवम् माम्, स-अधि-यज्ञम् च ये विदुः, प्र-याण-काले अपि च, माम् ते विदुः युक्त-चेतसः।
ये (जो) स-अधि-भूत (अधिभूत सहित) अधि-दैवम् (अधिदैव सहित) च (और) स-अधि-यज्ञम् (अधियज्ञ सहित) माम् (मुझे) प्र-याण-काले (प्रयाण काल में) अपि (भी) विदुः (जानते हैं) ते (वे) युक्त-चेतसः (योगयुक्त चित्त वाले) माम् (मुझे) च (भी) विदुः (जानते हैं)।
Hindi
अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ-सहित (अर्थात मैं ही यह सब हूँ) जो मुझे जानते हैं, वे युक्त-चेतस {होने के कारण} मरण-काल में भी मुझे जानते हैं {और मरण-काल में जो मुझे जानते हैं, स्मरण रखते हैं, वे मुझे ही प्राप्त करते हैं}।'
English
Those who recognize Me as the Ruler of the material world (Adhibhuta), the Lord of divine realms (Adhidaiva), and the Presiding Deity of sacrificial rituals (Adhiyajna), and whose consciousness incessantly flows toward Me, maintain their awareness of Me even at the moment of leaving this world. {and thus attain Me^2 }. (7:30)
^2 See verse 8:5.