3:8श्रीभगवानुवाच

Karma Yoga

कर्म योग

Sanskrit Shloka

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः॥ 3:8॥

Padacheeda (Word-by-Word)

नियतम् कुरु कर्म त्वम् कर्म ज्यायः हि अ-कर्मणः, शरीर-यात्रा अपि च ते न प्रसिद्ध्येत् अ-कर्मणः।।

Anvaya (Construction)

त्वम् (तुम) नियतम् (नियत) कर्म (कर्म) कुरु (करो) हि (क्योंकि) अ-कर्मणः (कर्म न करने से) कर्म (कर्म करना) ज्यायः (श्रेष्ठ है) च (और) अ-कर्मणः (कर्म न करने से) ते (तुम्हारी) शरीर-यात्रा (शरीर की यात्रा) अपि (भी) न (नहीं) प्रसिद्ध्येत् (सिद्ध हो सकती)।

Meaning

Hindi

तुम नियत कर्तव्य-कर्म करो, क्योंकि कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है, तथा कर्म न करने से शरीर-निर्वाह भी नहीं होता।


English

You ought to fulfill your prescribed duties because taking action is superior to inaction; life itself cannot persist without engaging in some form of work. (3:8)

Commentary

Hindi

आगे चलकर भगवान ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि क्या कर्तव्य है, क्या अकर्तव्य, इसमें शास्त्र ही प्रमाण हैं (16:23, 24)। इसलिए यहाँ 'नियत' कर्म का मतलब 'शास्त्र द्वारा नियत' होगा। लेकिन अगर कोई सरकार या किसी संस्था में कार्य कर रहा हो तो उस संस्था के द्वारा निर्धारित वैध कार्य भी 'नियत' कार्य में ही आएँगे, यदि वे 'विकर्म' (निषिद्ध कर्म, पाप-कर्म) की कोटि में नहीं आते हों।