Karma Yoga
कर्म योग
सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत। कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम्॥ 3:25॥
सक्ताः कर्मणि अविद्वांसः यथा कुर्वन्ति भारत, कुर्यात् विद्वान् तथा अ-सक्तः चिकीर्षुः लोक-सङ्ग्रहम् ।।
भारत (हे भारत )! कर्मणि (कर्म में) सक्ताः (आसक्त हुए) अविद्वांसः (ज्ञानहीन लोग) यथा (जैसे) कुर्वन्ति (करते हैं) अ-सक्तः (आसक्ति से मुक्त) विद्वान् (ज्ञानवंत) लोक-सङ्ग्रहम् (सभी प्राणियों के कल्याण की) चिकीर्षुः (इच्छा रखते हुए) तथा (वैसा ही) कुर्यात् (करे)।
Hindi
हे भरतवंशी अर्जुन! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं, विद्वान भी लोक-संग्रह और लोक-कल्याण के लिए उसी प्रकार कर्म करें, मगर आसक्ति-रहित होकर।
English
As the unenlightened remain busy with their work driven by attachment {to their works and their fruits}, O descendant of King Bharata, so should the enlightened work, though without attachment, to ensure that the world remains in balance. (3:25)