Karma Yoga
कर्म योग
इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः। तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव सः॥ 3:12॥
इष्टान् भोगान् हि वः देवाः दास्यन्ते यज्ञ-भाविताः, तैः दत्तान् अ-प्रदाय एभ्यः यः भुङ्क्ते स्तेनः एव सः ।।
यज्ञ-भाविताः (यज्ञ द्वारा पूजित होने वाले) देवाः (देवता) वः (तुम्हें) इष्टान् (प्रिय) भोगान् (भोगों को) हि (निश्चित रूप से) दास्यन्ते (देेंगे) तैः (उनके द्वारा) दत्तान् (दिए हुए भोगों को) यः (जो) एभ्यः (इनको) अ-प्रदाय (बिना दिये) भुङ्क्ते (भोगता है) सः (वह) स्तेनः (चोर) एव (ही है) ।
Hindi
यज्ञ के द्वारा प्रसन्न किए हुए देवता तुम लोगों को बिना माँगे ही इच्छित भोग निश्चय ही देते रहेंगे। इस प्रकार उन देवताओं के द्वारा दिए हुए उपहारों को जो उनको बिना कुछ अर्पित किए भोगता रहता है, वह चोर ही है।
English
Pleased by the sacrificial ritual of yajna, the gods will give you the pleasures you long for. He who enjoys these gifts of gods without offering them something in return is a stealer {said Brahmā}. (3:12)