Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥ 18:65॥
मत्-मनाः भव, मत्-भक्तः, मत्-याजी, माम् नम:-कुरु; माम् एव एष्यसि, सत्यम् ते प्रतिजाने, प्रियः असि मे।
मत्-मनाः (मुझमें मन लगाने वाला) भव (हो जाओ), मत्-भक्तः (मेरा भक्त बनो), मत्-याजी (मुझको अर्पित यज्ञ करने वाला हो), माम् (मुझे) नमः-कुरु (नमस्कार करो); माम् (मुझे) एव (ही) एष्यसि (प्राप्त होगे), ते (तुमसे) सत्यम् (सत्य) प्रतिजाने (प्रतिज्ञा करता हूँ)। मे (मुझे) प्रियः (प्रिय) असि (हो)।
Hindi
मन में मुझे बसा लो, मेरी भक्ति करो, मेरी अर्चना करो, मेरा नमन करो! इस प्रकार तुम मुझे प्राप्त कर लोगे, यह तुमसे मेरी सत्य प्रतिज्ञा है, क्योंकि तुम मेरे प्रिय हो।
English
Enshrine Me within your heart, nurture loving devotion toward Me, offer worship, and pay homage. With you being so dear to Me, I assure you that by doing so, you will reach Me. (18:65)