Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च । न विमुञ्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी॥ 18:35॥
यया स्वप्नम्, भयम्, शोकम्, विषादम्, मदम् एव च न वि-मुञ्चति दुर्-र्मेधाः— धृतिः सा पार्थ 'तामसी'।
पार्थ (हे पार्थ)! दुर्-मेर्धाः (बुरी बुद्धि वाला मनुष्य) यया (जिससे) स्वप्नम् (स्वप्न), भयम् (भय), शोकम् (शोक) च (और) विषादम् (विषाद), मदम् (अहंकार) एव (भी) न (नहीं) वि-मुञ्चति (छोड़ता), सा (वह) धृतिः (धारणा-शक्ति) 'तामसी' (तामसी होती है)।
Hindi
हे पार्थ! दुर्बुद्धि मनुष्य जिस संकल्प-शक्ति के द्वारा {अति} निद्रा, भय, शोक और विषाद को तथा मद (शराब) को भी नहीं छोड़ता अर्थात धारण किए रहता है, वह संकल्प या धारणा-शक्ति तामस है।
English
The holding power possessed by a foolish person, sustaining habits such as sleep, fear, grief, despair, and intoxication without relinquishing them, is in the Dark (Tāmasic) Mode, O, Pārtha. (18:35)
Hindi
मद' का अर्थ होता है 'नशा'। 'मदोन्मत्त' उसे कहते हैं जो नशे में उन्मत्त हो। शराब मुख्य नशा है, इसलिए यहाँ इसका अर्थ 'शराब' दिया गया है। शराबबंदी के लिए जो सरकारी विभाग होते हैं, उन्हें अकसर 'मद-निषेध विभाग' का नाम दिया जाता है।'मद' का लाक्षणिक प्रयोग 'घमंड', 'सत्ता, बल या धन का नशा' के रूप में भी होता है, जैसे — 'मदमस्त हाथी', 'मदांध राजा'। यहाँ दोनों अर्थ लिए जा सकते हैं। आप्टे के संस्कृत-अंग्रेज़ी शब्दकोश में 'मद' का पहला अर्थ है "drunkenness", और संस्कृत-हिंदी शब्दकोश में 'मादकता' दिया है। 'घमंड', 'अहंकार' — दोनों अर्थ वहाँ छठे क्रम पर हैं।