Moksha Sannyasa Yoga
मोक्ष संन्यास योग
बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं श्रृणु। प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनञ्जय॥ 18:29॥
बुद्धेः भेदम्, धृतेः च एव, गुणतः त्रि-विधम् श्रृणु, प्र-उच्य-मानम् अ-शेषेण पृथक्त्वेन, धनञ्जय!
धनञ्जय (हे धनञ्जय अर्जुन)! बुद्धेः (बुद्धि का) च (और) धृतेः (धृति का) एव (भी) गुणतः (गुणों के अनुसार) त्रि-विधम् (तीन प्रकार का) भेदम् (विभाजन) अ-शेषेण (पूर्ण रूप से) पृथक्त्वेन (अलग-अलग) प्र-उच्य-मानम् (कहा जाने वाला) श्रृणु (सुनो) !
Hindi
हे धनंजय अर्जुन! बुद्धि और धारणा-शक्ति का भी गुणों के अनुसार तीन प्रकार का भेद पूरी तरह से, एक-एक कर, संपूर्णता से कहा जाता है, जिसे सुनो।
English
O, Dhananjaya! Hear now the three-fold distinction of intellect and holding-power of mind based on the Modes of Nature, to be delineated comprehensively and separately. (18:29)