17:26श्रीभगवानुवाच

Shraddhatraya Vibhaga Yoga

श्रद्धात्रय विभाग योग

Sanskrit Shloka

सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते। प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते॥ 17:26॥

Padacheeda (Word-by-Word)

सत्-भावे, साधु-भावे च, "सत्" इति एतत् प्र-युज्यते; प्रशस्ते कर्मणि तथा "सत्" शब्दः, पार्थ, युज्यते।

Anvaya (Construction)

सत्' (सत्) इति (इस प्रकार) एतत् (यह) सत्-भावे (सत्य के भाव में) च (और) साधु-भावे (साधु के भाव में) प्र-युज्यते (प्रयोग किया जाता है) तथा (इस प्रकार) पार्थ (हे पार्थ), प्रशस्ते (प्रशंसनीय) कर्मणि (कर्म में) "सत्" (सत्) शब्दः (शब्द) युज्यते (उपयोग किया जाता है)।

Meaning

Hindi

अस्तित्व और साधुता—इन दो अर्थों में 'सत्' शब्द का प्रयोग किया जाता है; और हे पार्थ, इसी प्रकार अच्छे कर्मों के लिए भी 'सत्' शब्द प्रयोग किया जाता है।^12


English

This "sut" is used in two senses—existence and virtuosity; and O, Pārtha, it is also used to denote good deeds. (17:26)

Commentary

English

Like in the words satkarma, sadbhvāvanā, sadprayāsa, “sut” is used for good deeds.

Footnotes

^12 जैसे 'सत्कर्म', 'सद्भावना', 'सत्प्रयास' आदि में।